वक्त गुजरने को तो, चुप चाप गुजर गया,
वो एक मंजर क्यों, आँखों में ठहर गया,
उसने पूछा तो, हवाओं ने कहा होगा,
एक मुसाफिर था, रात आया सहर गया,
दर्द मेरा था जब तलक निगाहों में रहा,
अश्क बन बहा तो दुनिया में बिखर गया,
मिलना जुलना सीखा था तेरी सोहबत में,
बंद हैं किवाड़ें फिर, तू गया वो हुनर गया
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