ताज़ा गीत- love Story

17.2.12

मंदिरों -मस्जिद दरकार नही

काफिर तो नही हूँ मैं मगर , हाँ अंदाजे-परस्तिश है जुदा ज़रा,
दरकार नही मंदिरों -मस्जिद, हर सिम्त मुझे दिखता है खुदा मेरा,

ये तजुर्बा जरा सा ज़ाती है, सरे- आम बयान करना मुश्किल है,
आजमा के देख क्या मिलता है, तू भी इश्क में ख़ुद को मिटा ज़रा,

कभी बैठ के ख़ुद के रूबरू, आइना दिल को बना कर देख तो,
क्या दर्द है जो जल रहा है, ज़रा पूछ कि क्या है गम का माज़रा,

जब तक अम्मा- बापू रहते है, सर पर छत सी बनी रहती है,
दिखाता है असली रंग आसमान भी, जब उठ जाता है ये असरा,

ये तल्खियां भी ताक़त है, गम का ताप भी ज़रूरी है बहुत,
सफर मंजिलों का अभी बाकी है, तू रहने दे दिल मे गिला ज़रा,

मुझे शौक रफ़्तार का है, और जनूं हवा के रुख को मोड़ने का
हमे वक़्त को आज पीछे छोड़ देना है , मेरे हबीब कदम मिला ज़रा

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