मीठा सा दर्द है ,
मीठी चुभन है ,
जागें हैं सपने ,
सोये नयन है,
धड़कन है गुमसुम ,
बेसुध ये मन है,
ये प्यार है या " प्यार सा " कुछ और है
हल्का नशा है ,
बहका खुमार है,
महकी हवा है ,
हर सू बहार है,
बैचैनियाँ है,
फिर भी करार है,
ये प्यार है या " प्यार सा " कुछ और है
कैसी कसक
ये कैसी ख़लिश है,
किसकी तड़प
किसकी कशिश है,
क्यों है जलन ये ,
क्यों ये तपिश है,
ये प्यार है या " प्यार सा " कुछ और है
बजते है सुर अब ,
खामोशियों में,
मेले सजे हैं,
तनहाइयों में,
दिल को सकूं है
बेजारियों में,
ये प्यार है या " प्यार सा " कुछ और है
कानों मे मेरे
ये किसकी सदा है,
जब से सुनी है ,
दिल बेजुबा हैं,
जा में इबादत ,
लब पे दुआ है,
ये प्यार है या " प्यार सा " कुछ और है
न खुद से शिकवा,
न जग से गिला है,
दिल को यकीं ,
अब हो चला है,
कुछ दिन से जारी
जो ये सिलसिला है,
ये प्यार है , प्यार है, कुछ और नही बस प्यार है
बेख्वाब आँखों की बस्ती है -तुम हो ,
बिन मय के छायी ये मस्ती है- तुम हो ,
कुछ भी नही मेरी हस्ती है- तुम हो।
हाँ ये प्यार है , प्यार है, कुछ और नही बस प्यार है ।
कुछ पल जिन्दगी जैसे, जिंदगी के ही दामन से चुरा लिए मैंने । उन्ही जीवंत पलों को शब्दों मे पिरो कर पेश कर रहा हूँ। ये महफ़िल है मेरे दिल की, यहाँ कुछ गीत मिलेंगे सुर छेड़ते हुए, कुछ गज़लें होंगी हाथों मे जाम लिए, कुछ कवितायेँ भी मिलेंगी गहरी आँखों वाली, कुछ किस्से कुछ किरदार, इनमे से कुछ भी अगर आपके दिल को छू पाये तो खुशकिस्मत समझूंगा अपने आप को ....
ताज़ा गीत- love Story
28.6.07
22.6.07
जिन्दगी
बहुत सालों पहले जिन्दगी को समझने की एक कोशिश में मिली थी ये ग़ज़ल ... पेश ए नज़र है यारों ।
दर्द की एक दास्ताँ है जिन्दगी,
मौत का ही तो आइना है जिन्दगी ।
सच की पथरीली जमी पर,
झूठ का एक आसमा है जिन्दगी ।
दोस्तो से अजनबी और,
दुश्मनों से आशना है जिन्दगी ।
वक़्त बहता पानी है और,
बूँद का एक बुलबुला है जिन्दगी ।
हर कदम अंधा सफ़र है,
हादसों का सिलसिला है जिन्दगी ।
आपका दोस्त आपका साथी - सजीव सारथी
दर्द की एक दास्ताँ है जिन्दगी,
मौत का ही तो आइना है जिन्दगी ।
सच की पथरीली जमी पर,
झूठ का एक आसमा है जिन्दगी ।
दोस्तो से अजनबी और,
दुश्मनों से आशना है जिन्दगी ।
वक़्त बहता पानी है और,
बूँद का एक बुलबुला है जिन्दगी ।
हर कदम अंधा सफ़र है,
हादसों का सिलसिला है जिन्दगी ।
आपका दोस्त आपका साथी - सजीव सारथी
13.6.07
धूप की चुगली
जेठ का महीना और सूरज की गुगली ,
गर्म लू करे - धूप की चुगली ।
ए सी और कूलर को ठेंगा दिखाती , मुंडेर पे बैठी दुपहरी ,
छाँव को ढूंढे कुकुर , दो बूँद जल को गिलहरी ।
चवालीस, पैतालीस , चैयालीस, लगता है लगेगी हाफ सेंचुरी भी,
तपते तवे सा तापेगा आसमान , आग उगलेगी जमी भी ।
कर्फ्यू सा लगा सडकों पर , चढा जो मौसम का पारा ,
औंधे मुह गिरा सेंसेक्स भी, ठप्प पड़ा कामकाज सारा ।
एक ये कवि मन है , जिसे इस गरमी में भी चैन नही,
काँधे पर डाले कविता कि पोटली , ढूंढे ये नित ठौर नयी ।
- हाय री दिल्ली , तेरी गरमी को सलाम
गर्म लू करे - धूप की चुगली ।
ए सी और कूलर को ठेंगा दिखाती , मुंडेर पे बैठी दुपहरी ,
छाँव को ढूंढे कुकुर , दो बूँद जल को गिलहरी ।
चवालीस, पैतालीस , चैयालीस, लगता है लगेगी हाफ सेंचुरी भी,
तपते तवे सा तापेगा आसमान , आग उगलेगी जमी भी ।
कर्फ्यू सा लगा सडकों पर , चढा जो मौसम का पारा ,
औंधे मुह गिरा सेंसेक्स भी, ठप्प पड़ा कामकाज सारा ।
एक ये कवि मन है , जिसे इस गरमी में भी चैन नही,
काँधे पर डाले कविता कि पोटली , ढूंढे ये नित ठौर नयी ।
- हाय री दिल्ली , तेरी गरमी को सलाम
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