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23.7.07

नदी

सदियों से बह रहा हूँ किसी नदी की तरह......

जिन्दगी - मिली है कभी
किसी घाट पर,


तो किसी किनारे

कभी रुका हूँ पल दो पल,



जिस्म बन कर आकाश में उडा हूँ कभी,

तो कभी जमी पर ओंधे मूह पडे देखता हूँ - अपनी रूह को,



कभी किसी बूढे पेड की शाखों से लिपटा मिलता है,

तो कभी अनजानी आँखों में, अजनबी चेहरों में,कुछ दूढ्ता सा है,

कभी किसी मज़ार पर सजदे करता है,

तो कभी किसी पुराने मंदिर की सीढियों पर,पहरों बैठा मिलता है,



उलझी कडियों के परे ,

मैं देखता हूँ अक्सर,

एक छोटी सी बोतल,

जिसमे क़ैद है - एक देवता और एक शैतान,

जो बिना एक हुए बोतल से बाहर नही आ सकते,

एक होकर दोनो क़ैद से तो छूटते हैं,

पर लड़कर फिर अलग हो जाते हैं,

और अलग होकर वापस बोतल में सिमट जाते हैं,



याद नही ठीक से ,

वक़्त दोहरा चुका है ,

कितनी बार यह खेल,

दोहारायेगा अभी और कितनी बार,

कौन जाने,



सदियों से बह रहा हूँ किसी नदी की तरह......

13 टिप्‍पणियां:

Sanjeeva Tiwari ने कहा…

सुन्‍दर भाव । बधाई सजीव जी

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत बढिया रचना है।बधाई।

एक छोटी सी बोतल,

जिसमे क़ैद है - एक देवता और एक शैतान,

जो बिना एक हुए बोतल से बाहर नही आ सकते,

एक होकर दोनो क़ैद से तो छूटते हैं,

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया भाव हैं, भाई. अच्छा लगा पढ़कर.

Rachna Singh ने कहा…

just one word " nice"

manya ने कहा…

पूरी जिंदगी सिमट आई एक कविता में.. कई जगह खुद से मुलाकात हो गई,,.. कहां किसी के लिये है मुमकिन सबके लिये इक सा होना..

mamta ने कहा…

बहुत ही सुन्दर !

शैलेश भारतवासी ने कहा…

आम आदमी की ज़िदंगी की तरह यह कविता भी उलझी हुई है, लेकिन इसमें एक नदी की तरह प्रवाह है। नदी से मिलती-जुलती एक कविता आप मनीष वंदेमातरम् की यहाँ पढ़ सकते हैं।

anitakumar ने कहा…

wow! Sajeev ji bahut khoobsurat rachna hai..jeevan ki ek gehri philosophy kitni aasaani se keh di aapne
her aadmi mein ek sahitaan aur ek bhagwaan hota hai aur poora jeevan un dono ki jung chalti rehti hai kabhi koi jeeteta hai toh kabhi koi....is baat ko kitne achche aur saral dhang se keh gaye aap....badhaai.....Anita

shalini ने कहा…

sajeev ji,
सदियों से बह रहा हूँ किसी नदी की तरह......

जिन्दगी - मिली है कभी
किसी घाट पर,

तो किसी किनारे

कभी रुका हूँ पल दो पल,
man ke bhavo ko bahut khubsurti ke saath aap ne shabdo me piroya hai aap ko padna bahut sukhad ahsas hai badhai ho

ek insan ने कहा…

bahut sajeev aur dil ke kareeb bahut khoob

Anil masoomshayer

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव भरी रचना.... बहना ही जीवन है दोस्त...बीच में खुद प्यासे रह कर दूसरों की प्यास बुझाना.. जीवन की सार्थकता

रंजू ने कहा…

bahut bahut sundar ..kamaal ka likhate hain aap

Yatish Jain ने कहा…

नदी की मन्जिल समन्दर होती है
आप को भी अप्नी मन्जिल मिले
अपन सागर मिले
कम्यबी का महसागर मिले