छुई मुई है ह्रदय,
छू लो तो मुरझा जाता है,
किरणों के पंख तो लग नही सकते,
फिर क्यों ये छूना चाहता है,
- सूरज की जलती आग को।
रेशमी धागों में देखो,
बाँधता ही जाता है पल पल,
रिश्तों के दल दल में देखो,
धंसता ही जाता है पल पल,
एक ख़्वाब जो टुटा तो क्या,
फिर नया ख़्याल पल पल,
मुझ से ही कुछ रूठा रूठा,
मेरा ही दर्पण वो पल पल।
और बारिशों के मौसमों मे,
शाखों से होकर गुजरना,
शबनमी अहसास लेकर,
पथरीली गलियों पे चलना,
भागती दुनिया से हटकर,
अपनी ही राहें पकड़ना,
शौक़ इसके हैं निराले,
कब तलक कोई संभाले,
क्या करूं, मुश्किल है लेकिन,
खुद से ही बचकर गुजरना।
कुछ पल जिन्दगी जैसे, जिंदगी के ही दामन से चुरा लिए मैंने । उन्ही जीवंत पलों को शब्दों मे पिरो कर पेश कर रहा हूँ। ये महफ़िल है मेरे दिल की, यहाँ कुछ गीत मिलेंगे सुर छेड़ते हुए, कुछ गज़लें होंगी हाथों मे जाम लिए, कुछ कवितायेँ भी मिलेंगी गहरी आँखों वाली, कुछ किस्से कुछ किरदार, इनमे से कुछ भी अगर आपके दिल को छू पाये तो खुशकिस्मत समझूंगा अपने आप को ....
ताज़ा गीत- love Story
24.9.07
9.9.07
स्पर्श
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
संवेदना की आख़िरी परत तक
जिसकी पहुँच हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसकी निर्मल चेतना
घेरे मन और मगज हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसकी मीठी वेदना
अंतर्मन की समझ हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसके पार तुम्हें देखना
मेरे लिए सहज हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसकी अनुभूती के लिए
उम्र भी एक महज हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसमें सूर्य सी उष्मा हो
जिसमें चांद सी शीतलता
जिसमें ध्यान की आभा हो
जिसमें प्रेम की कोमलता
जिसमें लोच हो डाली सी
जिसमें रेत हो खाली सी
जिसमें धूप हो धुंधली सी
जिसमें छाँव हो उजली सी
जो तन मन को दे उमंग नयी
जो यौवन को दे तरंग नयी
जो उत्सव बना दे जीवन को
जो करूणा से भर दे इस मन को
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
संवेदना की आख़िरी परत तक
जिसकी पहुँच हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसकी निर्मल चेतना
घेरे मन और मगज हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसकी मीठी वेदना

अंतर्मन की समझ हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसके पार तुम्हें देखना
मेरे लिए सहज हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसकी अनुभूती के लिए
उम्र भी एक महज हो
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
जिसमें सूर्य सी उष्मा हो
जिसमें चांद सी शीतलता
जिसमें ध्यान की आभा हो
जिसमें प्रेम की कोमलता
जिसमें लोच हो डाली सी
जिसमें रेत हो खाली सी
जिसमें धूप हो धुंधली सी
जिसमें छाँव हो उजली सी
जो तन मन को दे उमंग नयी
जो यौवन को दे तरंग नयी
जो उत्सव बना दे जीवन को
जो करूणा से भर दे इस मन को
ऐसा स्पर्श दे दो मुझे
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